-
694
छात्र -
578
छात्राएं -
65
कर्मचारीशैक्षिक: 57
गैर शैक्षिक: 8
परिकल्पना
- के. वि. सं. उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक प्रयासों के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए अपने छात्रों को ज्ञान/मूल्य प्रदान करने और उनकी प्रतिभा, उत्साह और रचनात्मकता का पोषण करने में विश्वास रखता है।
उद्देश्य
- शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना है।
- स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने और गति निर्धारित करने के लिए।
- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) आदि जैसे अन्य निकायों के सहयोग से शिक्षा में प्रयोग और नवाचारों को शुरू करना और बढ़ावा देना।
- राष्ट्रीय एकता की भावना का विकास करना और बच्चों में “भारतीयता” की भावना पैदा करना।

विद्यालय के बारे में
उत्पत्ति
विद्यालय सीबीएसई से संबद्ध है और शिक्षा के 10+2 पैटर्न का पालन करता है। शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के अलावा, छात्रों को सह-पाठयक्रम गतिविधियों, खेल-कूद, क्लब गतिविधियों, कार्य अनुभव, स्काउट्स और गाइड, कंप्यूटर शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और सर्वांगीण लक्ष्य वाली मूल्य शिक्षा में भाग लेने के पर्याप्त अवसर प्रदान किए जाते हैं।
विद्यालय के दृष्टिकोण के बारे में
शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना; उत्कृष्टता को आगे बढ़ाने और स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में गति निर्धारित करने के लिए शिक्षा में प्रयोग और नवीनता को शुरू करने और बढ़ावा देने के लिए....
विद्यालय के उद्देश्य के बारे में
शिक्षा का एक सामान्य कार्यक्रम प्रदान करके रक्षा और अर्ध-सैन्य कर्मियों सहित स्थानांतरणीय केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करना; स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करना और गति निर्धारित करना शिक्षा में प्रयोग और नवीनता को आरंभ करने और बढ़ावा देने के लिए...
संदेश
श्री विकास गुप्ता, भा. प्र. से., आयुक्त
प्रिय विद्यार्थीगण, शिक्षकवृंद एवं अभिभावकगण,
केन्द्रीय विद्यालय संगठन के स्थापना दिवस–2025 पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
केन्द्रीय विद्यालय संगठन की असाधारण यात्रा, जिसकी शुरुआत 1963 में मात्र 20 रेजिमेंटल स्कूलों से हुई थी, आज 1289 केन्द्रीय विद्यालयों की विशाल श्रृंखला में विकसित हो चुकी है, जो उत्कृष्ट शिक्षा की ज्योति से राष्ट्र को आलोकित कर रही है।
श्री संजीत कुमार
उपायुक्त
विज्ञान एवं तकनीक के वर्तमान परिवेश में केन्द्रीय विद्यालय संगठन अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्शा रहा है। उसकी यह निरंतरता व्यक्तित्व के बहुआयामी विकास का मार्ग प्रशस्त कर उसे समग्रता की ओर उन्मुख करती है। केन्द्रीय विद्यालयों की शिक्षा उदारता से अनुप्राणित, ज्ञान की गहराई, चरित्र की संस्कृति एवं व्यक्तित्व की पूर्णता का अद्भुत सम्मिश्रण है। केन्द्रीय विद्यालयों ने विद्यार्थियों हेतु विविध क्षेत्रों में अपनी क्षमताएं एवं उत्कृष्टता साबित करने हेतु अनेकानेक अवसर प्रदान करने में अग्रणी पहल की है। विद्यार्थी इन विविध गतिविधियों के माध्यम से स्वयं को अभिव्यक्त कर आत्मविश्वास से सराबोर रहता है। केन्द्रीय विद्यालय संगठन के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी सकारात्मक सोच, अप्रतिम कर्तव्यनिष्ठता, आस्था एवं लगन से प्रत्येक कार्य को तन्मयता से कर अपनी कर्म निष्ठता का परिचय देते हैं साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम की नवीनतम तकनीक से भी अद्यतन रहते हैं। पल पल बदलते विशिष्ट क्षेत्रों को शिक्षा जगत से जोड़ना और अपने विद्यार्थियों को ज्ञानार्जन के अनेकानेक सोपानो पर आरोहण करना व लक्ष्य प्राप्ति हेतु सतत प्रयास करना हमारा उद्देश्य है। मैं हृदय के अंतः स्थल से जयपुर संभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों, शैक्षिक एवं गैर शैक्षिक कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के सतत प्रयासों के लिए साधुवाद देता हूँ जो प्रत्येक क्रियाकलाप को आगे बढ़ाने में अपनी महत्ती भूमिका निभा रहे हैं। आपके सहयोग से यह प्रयास अवश्य सफलीभूत होगा तथा सही दिशा में अवस्थित हो सकेगा ऐसा मेरा विश्वास है। ईश्वर हमें शक्ति दे कि हम अपनी एकनिष्ठता व सार्थक ऊष्मा से आप्लावित हो समाज को श्रेष्ठतम दे सकें। “कर्म का वाहन जहाँ तक चल सके साधना में लीन हो गाते रहो प्राण का दीपक जहाँ तक जल सके विश्व में आलोक फैलाते रहो” जय हिन्द श्री संजीत कुमार के. वि. सं., जयपुर संभाग
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डॉ. हितेन्द्र प्रताप सिंह
प्राचार्य
उद्देश्य : उन्नति, प्रगति एवं अच्छे के लिए परिवर्तन । यह सर्वविदित तथ्य है कि शिक्षा आपके पूरे जीवन को बदलने की शक्ति रखती है। सीखना आपकी सोचने की क्षमता और धारणा को बदल देता है। सीखने-सिखाने के कारण आप पूर्वकल्पित धारणाओं को तोड़ने लगते हैं। सीखने में यह अंतर आपको बिना किसी पूर्वाग्रह के दूसरों के साथ बातचीत करने और अपने क्षितिज का विस्तार करने में मदद करता है। शिक्षा का कार्य बेहतर और आलोचनात्मक ढंग से सोचना और जीवन के प्रति दृष्टिकोण और राय विकसित करने में मदद करना है। यह आपको दूसरों से सम्मान पाने और अपने दिमाग को तेज करने में मदद कर सकता है। धन्यवाद डॉ. हितेन्द्र प्रताप सिंह प्राचार्य
और पढ़ेंअद्यतनीकरण
- कक्षा III एवं कक्षा XI (मानविकी) में रिक्त स्थानों के लिए प्रवेश सूचना : सत्र 2026 – 27
- कक्षा III की रिक्त सीटों हेतु प्रवेश सूचना : 2026-27
- कक्षा 3, कक्षा 11 (मानविकी) एवं कक्षा 12 (विज्ञान एवं मानविकी) की रिक्त सीटों पर प्रवेश हेतु सूचना : 2026-27
- दिशानिर्देश एस एम सी : 2026
- कक्षा XI में केवल मानविकी संकाय में प्रवेश हेतु सूचना सत्र : 2026-27
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पी. एम. श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक १ सेना जोधपुर के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक प्राप्त किए ।
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शिक्षक
विद्यार्थी
नवप्रवर्तन
मिट्टी के बर्तन बनाने की कला
03/09/2023
विद्यालय के छात्रों ने मिट्टी के बर्तन बनाने की कला सीखी ओर उत्साहपूर्वक मिट्टी के बर्तन बनाए ।
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सी बी एस ई बोर्ड परीक्षा कक्षा X एवं कक्षा XII